BREAKING NEWS संस्कृत के संरक्षण हेतु ऐतिहासिक पहल: रायपुर में आयोजित होगा भव्य संस्कृत विद्वत सम्मेलन…
संस्कृत भाषा के संरक्षण व संवर्धन हेतु छत्तीसगढ़ में पहली बार सरयूपारीण ब्राम्हण सभा एवं संस्कृत भारती का संयुक्त आयोजन

BREAKING : रायपुर। सरयूपारीण ब्राम्हण सभा, रायपुर (छत्तीसगढ़) एवं संस्कृत भारती (छत्तीसगढ़) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संस्कृत विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व पहल मानी जा रही है। सम्मेलन में न केवल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से, बल्कि समीपवर्ती राज्यों से भी संस्कृत विषय से जुड़े वरिष्ठ आचार्यगण, शिक्षक, प्रकांड पंडित, लेखक और साहित्यकार शामिल होने आ रहे हैं। यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में संस्कृत विद्वानों का समागम ब्राम्हण समाज के द्वारा किया जा रहा है।
सभा के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला एवं संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य संस्कृत जैसी प्राचीन वेदभाषा के प्रति जनजागरण फैलाना और उसके महत्व को नई पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में संस्कृत का प्रयोग सीमित हो गया है, जिससे इसके संरक्षण की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर तुलसी भवन, रायपुर में इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल तुलसी भवन से हरदेव लाला मंदिर तक एक भव्य रैली के माध्यम से होगी, जिसमें 500 से अधिक संस्कृत विद्वानों के सम्मिलित होने की संभावना है। रैली के उपरांत कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संत तुलसीदास जी एवं भारत माता की पूजा-अर्चना के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष माननीय डॉ. रमन सिंह, राजश्री महंत रामसुंदर दास जी, एवं पूर्व कुलपति डॉ. सतेन्द्र सिंह सेंगर विशिष्ट रूप से उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम के समापन सत्र में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। साथ ही शिक्षा मंत्री माननीय गजेन्द्र यादव तथा दंडी स्वामी इंदुभवनन्द जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी। आयोजन में प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. दादू भाई त्रिपाठी एवं डॉ. श्री राम महादेव जी अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
इस अवसर पर समाज के तीन विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा तथा सरयूपारीण ब्राम्हण सभा द्वारा प्रकाशित एक विशेष ब्रोशर का विमोचन भी किया जाएगा। यह आयोजन न केवल संस्कृत भाषा के पुनरुत्थान की दिशा में एक प्रभावी कदम है, बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है।



