छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी: मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
30 उच्च जोखिम वाले ब्लॉकों से स्वास्थ्य अधिकारियों की सहभागिता, मातृत्व सुरक्षा और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर हुआ विशेष फोकस

अब कोई भी माँ प्रसव के दौरान अपनी जान न गंवाए”—इसी संकल्प को लेकर राजधानी रायपुर में एक दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मातृ मृत्यु दर (MMR) में हो रही वृद्धि को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से यह महत्वपूर्ण पहल की गई।कार्यशाला का शुभारंभ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया। उन्होंने कहा, “राज्य की असली शक्ति हमारी महिलाएँ हैं, और हर माँ की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मातृ मृत्यु दर में कमी लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कार्यक्रम का संचालन स्वास्थ्य सेवाओं की आयुक्त सह-संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला के मार्गदर्शन में किया गया। भारत सरकार की SRS रिपोर्ट (2021–23) के अनुसार राज्य में मातृ मृत्यु अनुपात में वृद्धि दर्ज की गई है। इसे देखते हुए कार्यशाला में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, एएनसी कवरेज सुधारने, प्रसवोत्तर देखभाल को सशक्त बनाने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ कराने पर विशेष चर्चा हुई।
राज्य के 30 ऐसे विकासखंड जहाँ मातृ मृत्यु दर अधिक है, वहाँ से BMO (खंड चिकित्सा अधिकारी), LHV (लेडी हेल्थ विजिटर) और CDPO (बाल विकास परियोजना अधिकारी) कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने अपनी जमीनी चुनौतियाँ, अनुभव और समाधान साझा किए। इस दौरान ब्लॉक स्तर पर संयुक्त कार्ययोजनाएँ भी तैयार की गईं।यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के चीफ फील्ड ऑफिसर श्री हेनरी विलियम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कहा कि यूनिसेफ राज्य को डेटा, प्रशिक्षण और नवाचारों के माध्यम से सहयोग करता रहेगा ताकि मातृत्व से जुड़ी हर मौत को रोका जा सके।कार्यशाला का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि “छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी” अभियान के माध्यम से राज्य मातृ मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम करेगा और मातृत्व को सुरक्षित बनाएगा।


