
BREAKING : छत्तीसगढ़ में सत्ता के गलियारों में एक बार फिर वही स्याही टपकी है जो डर दबाव और अहंकार की कहानी डीपीआर दफ्तर में अधिकारी संजीव तिवारी द्वारा पत्रकारों के ऊपर हाथ उठाने की बात नहीं है यह लोकतंत्र के गले पर रखी गई उंगली है छत्तीसगढ़ सरकार कहती है हम सुशासन दे रहे हैं पर सवाल यह भी है कि अगर पत्रकारों के ऊपर हमला करना ही सुशासन है तो अराजकता किसे कहते हैं यदि आईना तोड़ने पर उतर आए तो समझ लीजिए पत्रकार वह आइना है जो सच्चाई दिखाता है!
सुशासन का चेहरा जनता ने देख लिया है जहां किसी अधिकारी या नेताओं से सवाल पूछने पर झूठ बोलने वाले मंच पर घूम रहे हैं!
इतिहास गवाह है लाठी टूटती है पर स्याही नहीं सूखती कलम को डराने की कोशिश हर दौर में हुई है!

