मातृ स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण हेतु राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न…
news82express

रायपुर | राज्य में कुल 69 प्रथम प्रबंधन इकाइयाँ (First Referral Units – FRUs) नामित हैं, जो वर्तमान में क्रियाशील हैं। इन इकाइयों का उद्देश्य है कि गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं के कारण कोई भी गर्भवती महिला अपनी जान न गंवाए।
इसी लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राजधानी रायपुर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ से सहयोग से किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य मातृ मृत्यु में कमी लाना, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण करना तथा प्रथम प्रबंधन इकाइयों की भूमिका को और प्रभावी बनाना है।
कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी , OT स्टाफ नर्स, लेबर रूम स्टाफ नर्स एवं संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को जटिल प्रसव प्रबंधन, रेफरल प्रक्रिया, आपातकालीन सेवाएं एवं मातृ-नवजात स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर नैदानिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सरकार सतत रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस एवं रणनीतिक प्रयास कर रही हैl कार्यशाला के माध्यम से राज्य में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक सार्थक एवं प्रभावशाली पहल की गई है, जो मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संकेतकों में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगी।
इसी पृष्ठभूमि में, गुणवत्तापूर्ण व सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को प्रभावी रूप से कम करने के उद्देश्य से यह राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमे 170 स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया l यह पहल मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस कार्यशाला का संचालन आयुक्त सह-संचालक, स्वास्थ्य सेवाएँ, डॉ. प्रियंका शुक्ला के मार्गदर्शन में तथा यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह (छत्तीसगढ़) के नेतृत्व में किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में आयुक्त सह-संचालक, स्वास्थ्य सेवाएँ ने कहा, “मातृ मृत्यु दर में कमी लाना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए प्रत्येक संस्थान, विशेष रूप से प्रथम प्रबंधन इकाइयों की सेवाओं को सशक्त और उत्तरदायी बनाना अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ राज्य में गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यशाला में स्वास्थ सुविधाओं स्तर (FRUs) के अधिकारियों ने अपनी चुनौतियाँ और अनुभव साझा किए तथा मातृ मृत्यु को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजनाएँ तैयार कीं।
इस कार्यशाला को सफल बनाने में डॉ. सुरेंद्र पामभोई, संचालक एसआईएचएफडब्ल्यू, डॉ निर्मला यादव, संयुक्त संचालक आरसीएच, डॉ शैलेन्द्र अग्रवाल राज्य कार्यक्रम अधिकारी – मातृत्व स्वास्थ्य, डॉ सरिता अग्रवाल, विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूति रोग और टीम एम्स रायपुर, डॉ ज्योति जायसवाल विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूति रोग, डॉ स्मृति नायक, विशेषज्ञ, डॉ सुमा एक्का, विशेषज्ञ चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर, डॉ अभ्युदय शक्ति तिवारी, सहायक संचालक, डॉ श्वेताभ त्रिपाठी स्वास्थ्य अधिकारी यूनिसेफ, श्रीमती अभिलाशा शर्मा रात्रे, तकनीकी सलाहकार – मातृत्व स्वास्थ्य सबका भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन रहा |
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी इस थीम/विषय के साथ यूनिसेफ छत्तीसगढ के सहयोग से मातृत्व स्वास्थ्य पर इस वर्ष की यह दूसरी राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई है। यह कार्यशाला मातृत्व सुरक्षा को सामाजिक और सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।



