BREAKING: स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने सरकार ने चलाया विशेष अभियान…
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BREAKING : रायपुर,भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में युवाओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से अवगत कराने और नशा मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0’ का व्यापक स्तर पर संचालन किया जा रहा है। यह अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू की रोकथाम, युवाओं में जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है।
इसी क्रम में गुरुवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में शासकीय एवं निजी स्कूलों के प्राचार्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार के निर्देशन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी एवं NTCP नोडल अधिकारी डॉ. प्रीति नारायण के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP) के अंतर्गत किया गया, जिसमें कोटपा एक्ट 2003, तंबाकू के नशे से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य नुकसान, तथा स्कूलों को तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के रूप में प्रमाणित करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल परिसरों के 100 गज के दायरे में किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है।
कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर के रूप में डॉ. शिल्पा जैन (एसोसिएट प्रोफेसर, GDC रायपुर), डॉ. आनंद वर्मा (स्टेट कंसल्टेंट) एवं डॉ. संजय नामदेव उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला सलाहकार NTCP डॉ. सृष्टि यदु, जिला मीडिया प्रभारी गजेन्द्र डोंगरे, सोशल वर्कर नेहा सोनी, सेक्रेटेरियल असिस्टेंट कोमल साहू, अजय बेस सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान स्कूलों के प्राचार्यों को जन-जागरूकता के लिए आईईसी सामग्री वितरित की गई, ताकि स्कूल स्तर पर बच्चों और अभिभावकों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सके। इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ. प्रीति नारायण ने सभी प्रतिभागियों को तंबाकू मुक्त समाज की शपथ भी दिलाई।
छत्तीसगढ़ में तंबाकू सेवन बन रहा गंभीर समस्या
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में मुख कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू सेवन है। वर्तमान में राज्य में तंबाकू उपयोग की दर 39.1 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 26 प्रतिशत है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राज्य में तंबाकू नियंत्रण और जन जागरूकता के लिए और अधिक सख्त एवं प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है।



