
चिरमिरी। भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन रथ यात्रा 2026 श्रद्धा, आस्था और भक्ति के उल्लासपूर्ण वातावरण में भव्यता के साथ संपन्न हुई। रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ताओं ने सेवा, समर्पण और अनुशासन का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रथ यात्रा के दौरान अभाविप के स्वयंसेवक सुबह से ही विभिन्न सेवा कार्यों में सक्रिय रहे। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं प्रसाद वितरण, मार्गदर्शन, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था में सहयोग, स्वच्छता बनाए रखने तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे कार्य पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ किए गए। कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और अनुशासित कार्यशैली ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। बिना किसी व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज सेवा में जुटे युवाओं ने भारतीय संस्कृति के मूल भाव “नर सेवा ही नारायण सेवा” को साकार रूप दिया।
अभाविप के पदाधिकारियों ने बताया कि भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता, सहयोग और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक भी है। यह पर्व समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ते हुए प्रेम, भाईचारे और लोककल्याण का संदेश देता है। ऐसे आयोजनों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा भी देती है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपने स्थापना काल से ही “ज्ञान-शील-एकता” के आदर्शों पर कार्य करते हुए विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना, सेवा संस्कार और नेतृत्व क्षमता का विकास करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। परिषद का मानना है कि राष्ट्र निर्माण केवल शिक्षा से नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, चरित्र निर्माण और सामाजिक सहभागिता से भी संभव है। इसी उद्देश्य के साथ अभाविप समय-समय पर सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है।
रथ यात्रा में किए गए सेवा कार्यों के माध्यम से अभाविप ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान केवल धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सहयोग, संवेदना और सेवा पहुंचाने में निहित है। जब युवा अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्रहित में कार्य करते हैं, तभी सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।

