ब्रेकिंग : रायपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि हिंदू समाज अब संगठित हो रहा है, यह संघ के सौ वर्षों की साधना से संभव हुआ है, जिसकी कल्पना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि 100 वर्ष के इस कार्यकाल में अब जिम्मेदारी और बढ़ गई है, अब स्वयंसेवकों को संघ को बनाना होगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रायपुर महानगर इकाई ने रविवार को राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में स्वयंसेवकों के लिए शारीरिक प्रकटोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता संघ के सहसरकार्यवाह श्री चक्रधर शामिल हुए। वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अलेख समाज के संत उदयनाथ और और संघ के मध्यक्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेदु सक्सेना व महानगर संघचालक महेश बिड़ला विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भगवा ध्वज की प्रार्थना से हुई। इसके बाद पूर्ण गणवेश में मौजूद संघ के स्वयंसेवकों ने प्रतिदिन की शाखाओं में सिखाए जाने वाले दंड, नियुद्ध, पद विन्यास, दंड युद्ध, समता, गोपुर, योग, दंड व्यायाम, खेल और सामूहिक गीत का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में सह सरकार्यवाह श्री चक्रधर ने संघ के पंच परिवर्तन विषय की जानकारी देते हुए कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की बात तो बोलते हैं, लेकिन अपने व्यवहार में परिवार को संगठित करने और संभालना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सुसंगठित परिवार बनाना ही प्राथमिकता है, समरसता का भाव अपने घर से शुरू करना चाहिए, ऑक्सीजन के अभाव में कोरोना काल में प्राण गंवाए हैं, इसलिए पर्यावरण संरक्षण को समझना जरूरी है, इसके लिए काम करने की जरूरत है, प्लास्टिक के उपयोग को कम करें, अंग्रेजी कैलेंडर के बजाय हिंदू नव वर्ष को मनाने के साथ
हस्ताक्षर, फलक लेखन, निमंत्रण पत्र को हिंदी में लिखने की एक शुरुआत करें। श्री चक्रधर ने संघ के शताब्दी वर्ष में हिन्दू सम्मेलन के आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि युवाओं के बीच रहकर एक सशक्त और संगठित हिंदू समाज की रचना करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक विकास के साथ जीवन मूल्यों में भी बढ़त हो, समाज के सज्जन शक्ति को लेकर उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार परिवर्तन का कार्य करें।
यष्टी और मुष्टि से विद्रोहियों को करें ठीक :- संत उदयनाथ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अलेख समाज के संत उदयनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जिस समाज की कल्पना की थी, उसका स्वरूप आज दिखाई दे रहा है। यहां यष्टी और मुष्टि से विद्रोहियों को ठीक करने का काम स्वयंसेवक कर रहे हैं, जैसा भगवान कृष्ण ने किया था। उन्होंने स्वयंसेवकों के सामूहिक शक्ति प्रकटीकरण की प्रशंसा की। वहीं समाज में आपसी सहयोग की भावना जागृत करने संघ द्वारा उठाए जा रहे कार्यों को भाव समेत प्रकट किया।



