डीसीपी सेंट्रल जोन ने पॉलिटेक्निक कॉलेज में किया “संवाद से समाधान” कार्यक्रम…
News82express

रायपुर ( न्यूज 82 एक्सप्रेस) : रायपुर कमिश्नरेट के निर्देशन में डीसीपी सेंट्रल जोन के अंतर्गत थाना कोतवाली क्षेत्र में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज, रायपुर में “संवाद से समाधान” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति, यातायात नियमों की जानकारी देने के साथ-साथ पुलिस और आमजन के बीच संवाद को मजबूत बनाना रहा।
कार्यक्रम के दौरान डीसीपी सेंट्रल जोन उमेश प्रसाद गुप्ता (भा.पु.से.) ने छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण और व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने इंटरनेट पर सुरक्षित रहने, ऑनलाइन ठगी से बचने, फर्जी कॉल व संदिग्ध लिंक से सतर्क रहने, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने तथा सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर विशेष रूप से जोर दिया। साथ ही उन्होंने साइबर अपराध की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल ने रायपुर कमिश्नरेट की संरचना और कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाते हुए छात्र-छात्राओं से “साइबर दोस्त” अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने रायपुर कमिश्नरेट और रायपुर पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को फॉलो करने और जागरूक नागरिक की भूमिका निभाने का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम में एसीपी सिविल लाइन रमाकांत साहू ने नशा मुक्ति विषय पर संबोधित करते हुए युवाओं को नशे से दूर रहने, इसके दुष्परिणाम समझने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं एसीपी ट्रैफिक सतीश ठाकुर ने सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों के पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग तथा सुरक्षित वाहन संचालन की जानकारी दी।
इसके अलावा एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा ने थाना स्तर पर पुलिस की भूमिका, आमजन की समस्याओं के समाधान और पुलिस-जन सहयोग की अहमियत पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज की प्राचार्य वर्षा चौरसिया, पटेल सहित महाविद्यालय का स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं के साथ खुला संवाद किया गया, जिसमें उनके सवालों के जवाब देकर समस्याओं का समाधान किया गया। “संवाद से समाधान” कार्यक्रम के माध्यम से रायपुर कमिश्नरेट और डीसीपी सेंट्रल जोन द्वारा साइबर जागरूकता, नशा मुक्ति, यातायात अनुशासन और जनसहभागिता को मजबूत करने की दिशा में इसे एक प्रभावी पहल बताया गया।



