
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्री विनोद कुमार शुक्ला के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि साहित्य सृजन को समर्पित विनोद कुमार शुक्ला का संपूर्ण जीवन सादगी, संवेदनशीलता और साहित्य सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण रहा। उन्होंने भारतीय साहित्य को अपनी विशिष्ट शैली, गहन मानवीय संवेदना और मौन की सादगी से समृद्ध किया।
उन्होंने कहा कि श्री शुक्ला को वर्ष 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा वर्ष 2025 में साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी प्रमुख कृतियों में “नौकर की कमीज”, “दीवार में एक खिड़की रहती थी”, “झोपड़ी और बौना पहाड़”, “पेड़ पर कमरा”, “खिलेगा तो देखेंगे” सहित अनेक उपन्यास, कविता संग्रह और कहानियाँ शामिल हैं।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ला का निधन साहित्य जगत एवं छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने साधारण जीवन के अनुभवों को असाधारण संवेदना और गरिमा के साथ अभिव्यक्त किया। वे केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं, सरलता और गहन संवेदनशीलता के सृजनशील चिंतक थे।
उन्होंने कहा कि विनोद कुमार शुक्ला छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पहचान और सांस्कृतिक चेतना के अमिट प्रतीक के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देती रहेंगी।
मंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, पाठकों और प्रशंसकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।

