
रायपुर ( न्यूज 82एक्सप्रेस) :रायपुर के भाटागांव स्थित उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल को लेकर मरीज के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि मरीज को 24 घंटे से भी कम समय अस्पताल में रखने के बावजूद करीब 30 हजार रुपये का बिल बनाया गया। आरोप है कि बिल में ब्लड टेस्ट के शुल्क भी शामिल किए गए, जबकि कथित तौर पर कोई जांच कराई ही नहीं गई और न ही परिजनों को जांच की रिपोर्ट दी गई।मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान जिन जांचों के नाम पर शुल्क जोड़ा गया, उनके संबंध में न तो जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई और न ही ऐसी कोई रिपोर्ट उन्हें दिखाई गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच हुई ही नहीं, तो फिर जांच के नाम पर शुल्क किस आधार पर वसूला जा रहा
पार्षद के पहुंचने के बाद कम हुआ कथित अतिरिक्त शुल्क
मामले में जब क्षेत्रीय पार्षद को इसकी जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे, तब अस्पताल प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद कथित तौर पर अतिरिक्त शुल्क में कमी की गई। इससे बिलिंग प्रक्रिया को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल—बिना जांच के जांच शुल्क क्यों?
सवाल सिर्फ करीब 30 हजार रुपये के बिल का नहीं, बल्कि अस्पताल की बिलिंग पारदर्शिता और मरीजों से लिए जा रहे शुल्क का है। आखिर जांच की गई ही नहीं, उसके नाम पर मरीज के परिजनों से शुल्क क्यों लिया गया? क्या अस्पताल के पास प्रत्येक जांच का रिकॉर्ड मौजूद है? क्या मरीज के नाम पर दर्ज जांचों की रिपोर्ट अस्पताल उपलब्ध करा सकता है?आखिर कबतक चलता रहेगा छत्तीसगढ़ में प्राइवेट अस्पताल माफियाओ का राज़




